मां गंगा आरती

ओम जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ।जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥ चंद्रवंशी जोत तुम्हारी, जल निर्मल आता ।शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता ॥॥ ओम जय गंगे माता…॥ पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता ।कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुखदाता ॥॥ ओम जय गंगे माता…॥ एक ही … Read more

शुक्रवार आरती

आरती लक्ष्मण बालाजी कीअसुर संहारन प्राणपति की जगमग ज्योति अवधपुर राजेशेषाचल पै आप विराजे घंटा ताल पखावज बाजेकोटि देव मुनि आरती साजे किरीट मुकुट कर धनुष विराजेतीन लोक जाकी शोभा राजे कंचन थार कपूर सुहाईआरती करत सुमित्रा माई आरती कीजै हरि की तैसीध्रुव प्रहलाद विभीषण जैसी प्रेम मगन होय आरती गावेबसि बैकुण्ठ बहुरि नहीं आवै … Read more

महालक्ष्मी आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत,हरि विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता ॥ उमा,रमा,ब्रह्माणी,तुम ही जग-माता। सूर्य-चंद्रमा ध्यावत,नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता ॥ दुर्गा रूप निरंजनी,सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत,ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता ॥ तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय लक्ष्मी … Read more

श्री विश्वकर्मा आरती

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा ।सकल सृष्टि के करता,रक्षक स्तुति धर्मा ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । आदि सृष्टि में विधि को,श्रुति उपदेश दिया ।जीव मात्र का जग में,ज्ञान विकास किया ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । ऋषि अंगिरा तप से,शांति नहीं पाई ।ध्यान किया जब प्रभु का,सकल सिद्धि आई … Read more

श्री चित्रगुप्त जी की आरती

ॐ जय चित्रगुप्त हरे,स्वामी जय चित्रगुप्त हरे।भक्त जनों के इच्छित,फल को पूर्ण करें॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥ विघ्न विनाशक मंगलकर्ता,सन्तन सुखदायी।भक्तन के प्रतिपालक,त्रिभुवन यश छाई॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥ रूप चतुर्भुज,स्यामल मूरति, पीताम्बर राजै।मातु इरावती,दक्षिणा, वाम अङ्ग साजै॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥ कष्ट निवारण, दुष्ट संहार,प्रभु अन्तर्यामी।सृष्टि संहार, जन दुःख हरण,प्रकट हुए स्वामी॥ ॐ जय … Read more

आरती श्री भगवद् गीता

जय भगवद् गीते,जय भगवद् गीते ।हरि-हिय-कमल-विहारिणी,सुन्दर सुपुनीते ॥ कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि,कामासक्ति हरा ।तत्त्वज्ञान-विकाशिनि,विद्या ब्रह्म परा ॥॥ जय भगवद् गीते…॥ निश्चल-भक्ति-विधायिनी,निर्मल मल्हारी ।शरण-सहस्य-प्रदायिनि,सब विधि सुख कारी ॥॥ जय भगवद् गीते…॥ राग-द्वेष-विदारिणी,कारिणि मोद सदा ।भव-भय-हारिणि,तारिणी परमानंद प्रदा ॥॥ जय भगवद् गीते…॥ आसुर-भाव-विनाशिनि,नाशिनी तम रजनी ।दैवी सद् गुणदायिनि,हरि-रसिका सजनी ॥॥ जय भगवद् गीते…॥ समता, त्याग सिखावनि,हरि-मुख की बानी ।सकल शास्त्र … Read more

श्री विन्ध्येश्वरी आरती

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी,कोई तेरा पार न पाया । पान सुपारी ध्वजा नारियल,ले तेरी भेंट चढ़ाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी ॥ सुवा चोली तेरी अंग विराजे,केसर तिलक लगाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी ॥ नंगे पग माँ अकबर आया,सोने का छत्र चढ़ाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी ॥ ऊंचे पर्वत बन्यो देवालय,नीचे शहर बसाया … Read more

श्री बृहस्पति देव की आरती

जय बृहस्पति देवा,ऊँ जय बृहस्पति देवा ।छिन छिन भोग लगाऊँ,कदली फल मेवा ॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा,जय बृहस्पति देवा ॥ तुम पूरण परमात्मा,तुम अंतर्यामी ।जगतपिता जगदीश्वर,तुम सबके स्वामी ॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा,जय बृहस्पति देवा ॥ चरणामृत निज निर्मल,सब पातक हर्ता ।सकल मनोरथ दायक,कृपा करो भर्ता ॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा,जय बृहस्पति देवा ॥ तन, … Read more

श्री कुबेर आरती

ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे ,स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे। शरण पड़े भक्तों के,भंडार कुबेर भरे। ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥ शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,स्वामी भक्त कुबेर बड़े। दैत्य दानव मानव से,कई-कई युद्ध लड़े ॥ ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥ स्वर्ण सिंहासन बैठे,सिर पर छत्र फिरे,स्वामी सिर पर छत्र … Read more

आरती वैष्णो माता की

जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता।॥ जय वैष्णवी माता…॥शीश पे छत्र बिराजे, मुरतिया प्यारी।गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी॥॥ जय वैष्णवी माता…॥ ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे,शंकर ध्यान धरे।सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे॥॥ जय वैष्णवी माता…॥ सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे।बार-बार देखन को, ऐ मां मन चावे॥॥ जय वैष्णवी माता…॥ भवन … Read more