निर्जला एकादशी क्या है?
निर्जला एकादशी वह एकमात्र व्रत है जिसमें
अन्न और जल दोनों का त्याग
किया जाता है। यह व्रत
24 एकादशियों के बराबर फल
देता है।
निर्जला एकादशी वह एकमात्र व्रत है जिसमें
अन्न और जल दोनों का त्याग
किया जाता है। यह व्रत
24 एकादशियों के बराबर फल
देता है।
क्यों कहा जाता है सबसे कठिन?क्यों कहा जाता है सबसे कठिन?
क्यों कहा जाता है सबसे कठिन?क्यों कहा जाता है सबसे कठिन?
– इस व्रत में
एक बूंद पानी भी नहीं पिया जाता
– मानसिक और शारीरिक दोनों तपस्या
– मोक्षदायक माना गया है
निर्जला एकादशी की कथा (Short Version)
भीमसेन भूख-प्यास के कारण एकादशी व्रत नहीं रख पाते थे।
वेद व्यास जी ने उन्हें यह कठोर व्रत बताया,
जो वर्ष में एक बार रखने से
सब एकादशी का फल
देता है।
निर्जला एकादशी 2026 तिथि
📅
25 जून 2026, गुरुवार
🕕
एकादशी प्रारंभ: 24 जून, 06:12 AM
🕗 समाप्त: 25 जून, 08:09 AM
पारण (व्रत खोलने का समय)
🥛
26 जून 2026 – सुबह 05:10 से 07:54 बजे
⛔ द्वादशी खत्म होने के बाद पारण नहीं करना चाहिए।
व्रत कैसे करें?
–
– ब्रह्म मुहूर्त में स्नान
– विष्णु जी की पूजा
– तुलसी दल अर्पित करें
– मंत्र जाप:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
– रात्रि में भजन-कीर्तन
क्या करना चाहिए?
✔ जल दान
✔ पीले वस्त्र दान
✔ तुलसी की पूजा
✔ गौ सेवा
✔ संयम व शांत मन
क्या नहीं करना चाहिए?
❌ तामसिक भोजन
❌ जल सेवन
❌ झूठ बोलना
❌ किसी का अपमान
❌ पारण देर से करना
निर्जला एकादशी के लाभ
✨ पापों का नाश
✨ 24 एकादशियों का फल
✨ धन, सुख, शांति
✨ स्वास्थ्य और दीर्घायु
✨ मोक्ष की प्राप्ति
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