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  • श्री मनसा देवी की आरती

    जय मनसा माता श्री जय मनसा माताजो नर तुमको ध्याता, जो नर मैया जी को ध्याता मनवांछित फल पाता।जय मनसा माता। जरत्कारु मुनि पत्नी,तुम वासुकि भगिनी मैया तुम वासुकि भगिनी कश्यप की तुम कन्या आस्तीक की माता।सुरनर मुनिगण ध्यावत,सेवत नर नारी मैया सेवत नर नारीगर्व धन्वन्तरि नाशिनी,हंस वाहिनी देवी जय नागेश्वरी माता।जय मनसा माता। पर्वतवासिनी…

  • श्री शारदा आरती

    भुवन विराजी शारदा,महिमा अपरम्पार। भक्तों के कल्याण कोधरो मात अवतार ॥ मैया शारदा तोरे दरबारआरती नित गाऊँ। मैया शारदा तोरे दरबारआरती नित गाऊँ। नित गाऊँ मैया नित गाऊँ। मैया शारदा तोरे दरबारआरती नित गाऊँ। श्रद्धा को दिया प्रीत की बातीअसुअन तेल चढ़ाऊँ। श्रद्धा को दीया प्रीत की बातीअसुअन तेल चढ़ाऊँ । दरश तोरे पाऊंमैया शारदा…

  • श्री विश्वकर्मा आरती

    जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा ।सकल सृष्टि के करता,रक्षक स्तुति धर्मा ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । आदि सृष्टि में विधि को,श्रुति उपदेश दिया ।जीव मात्र का जग में,ज्ञान विकास किया ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । ऋषि अंगिरा तप से,शांति नहीं पाई ।ध्यान किया जब प्रभु का,सकल सिद्धि आई…

  • श्री विश्वकर्मा आरती

    प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवोप्रभु विश्वकर्मा।सुदामा की विनय सुनीऔर कंचन महल बनाए।सकल पदारथ देकर प्रभु जी दुखियों के दुख टारे॥ प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो…॥विनय करी भगवान कृष्ण ने द्वारकापुरी बनाओ।ग्वाल बालों की रक्षा की प्रभु की लाज बचाओ॥ प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो…॥रामचंद्र ने पूजन कीतब सेतु बांध रचि डारो।सब सेना को पार किया…

  • आरती श्री भगवद् गीता

    जय भगवद् गीते,जय भगवद् गीते ।हरि-हिय-कमल-विहारिणी,सुन्दर सुपुनीते ॥ कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि,कामासक्ति हरा ।तत्त्वज्ञान-विकाशिनि,विद्या ब्रह्म परा ॥॥ जय भगवद् गीते…॥ निश्चल-भक्ति-विधायिनी,निर्मल मल्हारी ।शरण-सहस्य-प्रदायिनि,सब विधि सुख कारी ॥॥ जय भगवद् गीते…॥ राग-द्वेष-विदारिणी,कारिणि मोद सदा ।भव-भय-हारिणि,तारिणी परमानंद प्रदा ॥॥ जय भगवद् गीते…॥ आसुर-भाव-विनाशिनि,नाशिनी तम रजनी ।दैवी सद् गुणदायिनि,हरि-रसिका सजनी ॥॥ जय भगवद् गीते…॥ समता, त्याग सिखावनि,हरि-मुख की बानी ।सकल शास्त्र…

  • आरती वैष्णो माता की

    जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता।॥ जय वैष्णवी माता…॥शीश पे छत्र बिराजे, मुरतिया प्यारी।गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी॥॥ जय वैष्णवी माता…॥ ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे,शंकर ध्यान धरे।सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे॥॥ जय वैष्णवी माता…॥ सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे।बार-बार देखन को, ऐ मां मन चावे॥॥ जय वैष्णवी माता…॥ भवन…

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