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विजय एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार है, जो फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे करने से व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है। साल 2025 में विजय एकादशी 28 फरवरी, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त पूरे दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं।

विजय एकादशी का महत्व

विजय एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को जीवन के हर संघर्ष में विजय प्राप्त होती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक बल्कि मानसिक और शारीरिक शुद्धि का भी प्रतीक है।

विजय एकादशी 2025 का शुभ मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 27 फरवरी 2025, रात 09:57 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 28 फरवरी 2025, रात 11:18 बजे
  • व्रत पारण का समय: 01 मार्च 2025, सुबह 06:45 बजे से 09:00 बजे तक

व्रत का पारण द्वादशी तिथि के दौरान किया जाना चाहिए। पारण के समय सूर्योदय के बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिए।

विजय एकादशी व्रत कथा

विजय एकादशी की कथा के अनुसार, त्रेता युग में भगवान राम जब लंका पर चढ़ाई करने जा रहे थे, तो उन्हें समुद्र पार करने में कठिनाई हो रही थी। तब ऋषि वशिष्ठ ने भगवान राम को विजय एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। भगवान राम ने इस व्रत को किया और समुद्र पार कर लंका पर विजय प्राप्त की। इसके बाद से ही इस व्रत को “विजय एकादशी” के नाम से जाना जाने लगा।

विजय एकादशी पूजा विधि

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें: इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी या घर पर ही स्नान करें।
  2. व्रत का संकल्प लें: भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें और पूरे दिन उपवास रखें।
  3. भगवान विष्णु की पूजा करें: घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और उन्हें तुलसी दल, फल, फूल और मिठाई अर्पित करें।
  4. मंत्रों का जाप करें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  5. रात्रि जागरण: रात में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करें।

विजय एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

विजय एकादशी का व्रत न केवल धार्मिक बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस दिन भक्त अपने मन और आत्मा को शुद्ध करते हुए भगवान विष्णु की कृपा पाने का प्रयास करते हैं। यह व्रत व्यक्ति को आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास प्रदान करता है।

विजय एकादशी पर क्या करें और क्या न करें

  • क्या करें:
  • पूरे दिन उपवास रखें।
  • भगवान विष्णु की पूजा करें और मंत्रों का जाप करें।
  • दान-पुण्य करें और गरीबों की मदद करें।
  • रात में जागरण करें और भजन-कीर्तन करें।
  • क्या न करें:
  • इस दिन मांसाहार और मदिरा का सेवन न करें।
  • किसी भी प्रकार का नकारात्मक विचार मन में न लाएं।
  • झूठ बोलने और किसी का दिल दुखाने से बचें।

निष्कर्ष

विजय एकादशी 2025 का पर्व भक्तों के लिए भगवान विष्णु की कृपा पाने का सुनहरा अवसर होगा। इस दिन पूजा, व्रत और ध्यान के माध्यम से भक्त अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर सकते हैं। इस पावन पर्व पर भगवान विष्णु की आराधना करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

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