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हिंदू धर्म के प्रमुख और पावन पर्वों में नरसिंह द्वादशी का विशेष महत्व है। यह शुभ तिथि भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नरसिंह के प्राकट्य के उपलक्ष्य में श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार भगवान नरसिंह ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा और अधर्मी असुर राजा हिरण्यकश्यप के विनाश के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया था।

नरसिंह द्वादशी 1
नरसिंह द्वादशी

भगवान नरसिंह का स्वरूप अत्यंत अद्भुत था। उनका धड़ मनुष्य के समान और मुख सिंह के रूप में था। यह अवतार ईश्वर की लीला और धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। नरसिंह द्वादशी के दिन भक्त भगवान नरसिंह की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना, व्रत और पाठ करते हैं। यह पर्व यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति और धर्म की रक्षा के लिए भगवान स्वयं प्रकट होते हैं और अधर्म का अंत सुनिश्चित करते हैं।

नरसिंह द्वादशी शुभ महूर्त और उसका महत्व

हिंदू धर्मग्रन्थों के अनुसार भगवान नरसिंह को अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना का प्रतीक माना गया है। उनका अवतार बुराई पर अच्छाई की विजय, अदम्य साहस और दिव्य शक्ति का संदेश देता है। विभिन्न शास्त्रों में नरसिंह अवतार की महिमा तथा नरसिंह द्वादशी के आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है।

मान्यता है कि जो भक्त इस पावन तिथि पर भगवान नरसिंह की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना और व्रत करते हैं, उन्हें विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन की उपासना से शत्रुओं पर विजय, भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति, रोगों से रक्षा तथा जीवन के दुर्भाग्य दूर होने का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही भगवान नरसिंह अपने भक्तों को साहस, समृद्धि, ऐश्वर्य और सफलता प्रदान करते हैं।

वर्ष 2026 में नरसिंह द्वादशी शनिवार, 28 फरवरी को मनाई जाएगी।

  • नरसिंह द्वादशी तिथि का आरंभ :- 27 फरवरी 2026 को रात्रि 10:32 बजे होगा
  • नरसिंह द्वादशी तिथि का समापन:- 28 फरवरी 2026 को रात 08:43 बजे होगा।
  • द्वादशी पारण का शुभ समय:- 1 मार्च 2026 को प्रातः 06:21 बजे से 08:41 बजे तक रहेगा।

पारण के दिन द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व समाप्त हो जाएगी। इस शुभ मुहूर्त में की गई पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

जाने नरसिंह द्वादशी के शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त – 04:43 ए एम से 05:33 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या – 05:08 ए एम से 06:22 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त – 11:47 ए एम से 12:34 पी एम
  • विजय मुहूर्त – 02:07 पी एम से 02:53 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त – 05:57 पी एम से 06:22 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या – 05:59 पी एम से 07:13 पी एम
  • अमृत काल – 07:18 ए एम से 08:49 ए एम
  • निशिता मुहूर्त – 11:45 पी एम से 12:35 ए एम, मार्च 01 02:26 ए एम, मार्च 01 से 03:58 ए एम, मार्च 01
  • त्रिपुष्कर योग – 06:22 ए एम से 09:35 ए एम

नरसिंह द्वादशी पर क्या करें

  • ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान कर मन और शरीर को शुद्ध करें।
  • स्वच्छ और पवित्र वातावरण में पूजा की तैयारी करें।
  • इस शुभ दिन पर पीले रंग के वस्त्र धारण करना उत्तम माना जाता है।
  • पूजा स्थल पर भगवान नरसिंह की प्रतिमा या चित्र को श्रद्धापूर्वक स्थापित करें।
  • पुष्प, फल, मिष्ठान और नैवेद्य भगवान नरसिंह को अर्पित करें।
  • पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखें।
  • विधि-विधान से भगवान नरसिंह की आराधना, मंत्र जप और स्तुति करें।

नरसिंह द्वादशी पर क्या न करें

इस पावन दिन देर तक सोने या पूजा में आलस्य करने से बचें।

  • क्रोध, झगड़ा, कटु वचन और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
  • तामसिक भोजन, मांस-मदिरा और नशे का सेवन न करें।
  • पूजा के समय अशुद्ध वस्त्र या गंदे स्थान का उपयोग न करें।
  • व्रत रखने की स्थिति में बिना कारण व्रत न तोड़ें।
  • असत्य बोलने, छल-कपट और किसी का अपमान करने से बचें।

मन में भय, द्वेष या अहंकार न रखें।

यही थी नरसिंह द्वादशी 2026 से जुड़ी संपूर्ण जानकारी। हमारी मंगलकामना है कि इस पावन अवसर पर भगवान नरसिंह की कृपा से आपके जीवन में साहस, सुरक्षा, शांति और समृद्ध का वास हो। आपकी श्रद्धा, व्रत, पूजा-पाठ और साधना सफल हों तथा जीवन में सभी बाधाओ ं का नाश हो। नरसिंह द्वादशी जैसे पवित्र पर्व हमें धर्म की रक्षा, सच्ची भक्ति और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देते हैं। व्रत, पर्व और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी ऐसी ही आध्यात्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहिए ‘वेद पुराण ज्ञान‘ के इस आध्यात्मिक मंच के साथ।

Source – srimandir

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