अयोध्या के श्री राम मंदिर

अयोध्या के श्री राम मंदिर से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य – 2023

कुछ नया

श्री राम मंदिर – नमस्कार मित्रों आपका एक बार फिर स्वागत है। अब राम भक्तों का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। क्योंकि अयोध्या में भव्य और दिव्या राम मंदिर का निर्माण तेजी से जारी है। अयोध्या में बन रहा रामलला का मंदिर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हिंदू मंदिर होगा, लेकिन इस राम मंदिर के निर्माण कार्य से जुड़ी कई रोचक तत्व हैं, जो आपको जरूर चौंका देंगे।

Source – Google श्री राम मंदिर

Table of Contents

एक हजार साल तक टिकने की क्षमता

बताया जा रहा है कि श्री राम मंदिर को अगले 1000 साल तक मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ेगी। मंदिर को रिक्टर स्केल पर भूकंप के 6.5 लेवल तक के झटकों से भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

टाइम कैप्सूल – श्री राम मंदिर

श्री राम मंदिर के नीचे करीब 2000 फीट की गहराई पर एक टाइम कैप्सूल को भी रखा गया है। इस कैप्सूल में अयोध्या राम जन्मभूमि और भगवान राम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी को समावेश किया गया है। यह कैप्सूल हजारों साल बाद भी लोगों को इस मंदिर की संपूर्ण जानकारी पहुंचने में सक्षम होगा।

नहीं हुआ है स्टील का इस्तेमाल

श्री राम मंदिर इमारत को ऊपर से नीचे तक इतनी मजबूती दी गई है, यह बड़े से बड़े झटके को भी सह सके। मंदिर इमारत को पूरी तरह से पत्थरों से बनाया जा रहा है। इसमें किसी भी प्रकार के धातु जैसे लोहे और स्टील का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। श्री राम मंदिर

पवित्र स्थलों की मिट्टी है समाहित

श्री राम मंदिर की नींव रखने के लिए देशभर से करीब 2,587 पवित्र स्थान से मिट्टी लाई गई है। इन स्थानों में यमुनोत्री, हल्दीघाटी, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे पवित्र स्थान को भी शामिल किया गया है।

पावन नदियों के जल का उपयोग

श्री राम मंदिर की नींव रखने में करीब 1500 नदियों के पवित्र जल का भी उपयोग किया गया है। इसमें आठ से ज्यादा बड़ी नदियां, तीन समुद्र और श्रीलंका के 16 स्थान के पवित्र जल को शामिल किया गया है। इसके साथ ही मानसरोवर के जल का भी उपयोग 150 नदियों में किया गया है।

भव्य होगा मुख्य द्वार

श्री राम मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार सिंह द्वारा होगा। जबकि पांच मंडप होंगे। जिन को सागौन की लकड़ी से बनाया जा रहा है। भक्त सिंह द्वारा के जरिए जैसे ही मंदिर में प्रवेश करेंगे। सामने उनको नित्य मंडप, रंग मंडप और गूढ़ मंडप दिखाई देंगा।

अन्य खासियत

श्री राम मंदिर में कुल 392 पिलर होंगे। गर्भ ग्रह में 160 और ऊपरी तल में 132 खंबे होंगे। मंदिर परिसर में सूर्य देवता, भगवान विष्णु और पंचदेव मंदिर का भी निर्माण किया जा रहा है।

राम मंदिर

क्या है विशेष ?

धर्म पथ पर अभी वाहनों के आने-जाने के लिए नौ-नौ मीटर चौड़े फोरलेन मार्ग बनाए गए हैं। लेकिन अब इन मार्गों के दोनों ओर सात-सात मीटर चौड़े मार्गों के निर्माण का प्रस्ताव दिया गया है।

धर्म पथ को लेकर कई योजनाएं बनाई जा रही हैं। इसी क्रम में लोक निर्माण विभाग की ओर से फोरलेन वाले इस मार्ग को भविष्य में आठ लेन किए जाने का भी प्रस्ताव बनाया गया है। हालांकि अभी इस पर शासन के निर्णय की प्रतीक्षा की जा रही है। ये निर्माण होने के बाद धर्मपथ रामनगरी का पहला आठ लेन वाला मार्ग होगा।

लोक निर्माण विभाग से जुड़े एक अभियंता ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि धर्म पथ में किए जाने वाले विस्तार से जुड़ी इस योजना के पीछे प्रशासन का मकसद है कि भविष्य में वाहनों का आवागमन बढ़ने एवं मेले जैसे किसी बड़े आयोजन पर भी यातायात निर्बाध रूप से चलता रहे। श्री राम मंदिर

विकसित हो रहा है वीवीआईपी मार्ग

धर्म पथ का निर्माण राममंदिर तक पहुंचाने वाले वीवीआईपी मार्ग के रूप में किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग एवं विकास प्राधिकरण संयुक्त रूप से इस मार्ग को हर तरह से सुगम और भव्य बनाने का कार्य कर रहे हैं। एनएच-27 पर रामघाट होते हुए लता चौक तक दो किलोमीटर लंबे इस मार्ग को राममंदिर का आकर्षण बनाने के लिए कई विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।

प्रवेश द्वार के शीर्ष पर विराजमान होंगे सूर्यदेव

इसके अलावा हरियाली से सुसज्जित डिवाइडर के साथ इस मार्ग का प्रवेश द्वार भी काफी आकर्षक होगा, जहां दीवारों पर रामायण के प्रसंग का जीवंत चित्रण किया जायेगा। वहीं प्रवेश द्वार के शीर्ष पर रथ पर सवार सूर्यदेव विराजमान होंगे। फाइबर रिइंफोर्सड प्लास्टिक यानि एफआरपी से निर्मित सूर्यदेव की प्रतिमा भी यहां पहुंच गई हैं।

आपको बता दें कि फाइबर रिइंफोर्सड प्लास्टिक का वजन कम होता है, लेकिन इसमें मजबूती काफ़ी ज़्यादा होती है। दीवार पर रामायण के प्रसंग चित्रित करने व सूर्यदेव की प्रतिमा से सुसज्जित प्रवेश द्वार का निर्माण विकास प्राधिकरण द्वारा कराया जायेगा।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर एक दृष्टि

22 जनवरी 2024 को रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा उत्सव के अवसर पर कई भव्य आयोजन किये जा रहे हैं, ऐसे में इस समारोह में शामिल होने वाले अतिथियों के लिए भी विशेष प्रबंध किये जा रहे हैं। इस अवसर पर देश के कई अलग-अलग प्रांतों के व्यंजनों के भंडारे लगाये जायेंगे।

अतिथियों के लिये विशेष व्यवस्थाएं

आपको बता दें कि बाग बिजेसी के तीर्थ क्षेत्र पुरम में 20 हजार अतिथियों के लिए आवासीय व्यवस्था की जा रही है। यहां छह जगहों पर भोजनालय चलाया जायेगा, जिसके लिये तीन संचालक चयनित किये जा चुके हैं।

ये प्रांत लगाएंगे भंडारा

इस परिसर में दिल्ली, महाराष्ट्र, नागपुर व पंजाब के विशेष व्यंजन बनाये जायेंगे। भोजनालय की व्यवस्था प्रमुख विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज देख रहे हैं, और बाग बिजेसी में संपूर्ण व्यवस्था क्षेत्रीय संगठन मंत्री गजेंद्र सिंह सम्हालेंगे। इसके अलावा मणिराम दास जी की छावनी व कारसेवकपुरम में भी भंडारे का आयोजन किया जायेगा।

जिन प्रांतों के व्यंजन बनाये जायेंगे, वहां के भोजन बनाने वाले विशेषज्ञ अपने साथ सभी सामग्री भी लाएंगे। हिंदी भाषी प्रदेशों के अलावा तमिलनाडु, केरल, उड़ीसा, तेलंगाना सहित दक्षिण भारत के भंडारा संचालकों का चयन किया गया है। पूरी योजना के बारे में बात करें तो 35 स्टालों पर भंडारे का आयोजन किया जायेगा।

भक्त इन व्यंजनों का ले सकेंगे आनंद

इस उत्सव में विशेष रूप से पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र के खानपान से जुड़े भंडारे चलाए जाएंगे, जिसका आनंद इस समारोह में सम्मिलित होने वाले देश-विदेश के सभी अतिथि व श्रद्धालु ले सकेंगे। इसमें उत्तर भारत के साथ-साथ दक्षिण भारत के लोकप्रिय व्यंजन परोसे जाएंगे। यहां पूड़ी, साग, हलुआ, दिल्ली का राजमा-चावल व पंजाबी भक्तों के लिए छोला-भटूरा, पराठा आदि व्यंजन बनाये जायेंगे।

इसके अलावा भक्त महाराष्ट्र की पावभाजी, राजस्थान की दाल बाटी व चूरमा का भी स्वाद ले सकेंगे। वहीं तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश व केरल की खास इडली, डोसा व सांभर भी इस भंडारे के मुख्य आकर्षण होंगे।

नवनियुक्त अर्चकों का प्रशिक्षण

अयोध्या के श्री राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पूजा अर्चना के लिए पंचोपचार विधि से न करके रामानंदीय पूजा पद्धति अपनाई जाएगी, जिसके लिए नवनियुक्त पुजारियों का प्रशिक्षण आरंभ कर दिया गया है, जो छह महीने तक चलेगा।

सिखाया जाएगा मंत्रों का शुद्ध एवं लयबद्ध पाठ

तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सभागार में 21 अर्चकों को मंत्रों के शुद्ध उच्चारण और लय में पाठ करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आपको बता दें कि पिछले महीने पुजारी पद पर 3,000 आवेदकों में से 200 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए चयनित किया गया था। इस साक्षात्कार की प्रक्रिया अयोध्या के कारसेवकपुरम में पूरी की गई। जिसके बाद इनमें से 21 उम्मीदवारों को प्रशिक्षण के लिए चुना गया। प्रशिक्षित किए जा रहे अर्चक वेद के अलावा रामानंदीय पूजा पद्धति के बारे में ज्ञान अर्जित कर रहे हैं। यूं तो इस प्रशिक्षण के लिए धर्मशास्त्रों में विशेषज्ञता रखने वाले कई विद्वान आचार्य नियुक्त किये गये हैं, लेकिन इस प्रशिक्षण का आरंभ आचार्य केशव ने मंत्रों की शुद्धता और मंत्रों के लय क्रमिक पाठ से किया।

अर्चकों को पूजा अर्चना में पारंगत करने के लिए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा एक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने जानकारी दी कि जो उम्मीदवार सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करेंगे, उन्हें छह महीने के प्रशिक्षण के बाद विभिन्न पदों पर नियुक्त किया जाएगा। इस दौरान उनके रखने खाने की व्यवस्था निःशुल्क की जायेगी, साथ ही उन्हें 2000 रुपए की छात्रवृत्ति भी दी जाएगी।

निर्धारित किये गये हैं ये 4 सत्र

प्रशिक्षण के लिए सत्र निर्धारण का कार्यक्रम प्रारंभ हो चुका है, जिसमें वेद मंत्रों का लय सहित उच्चारण सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अलावा अर्चकों के प्रशिक्षण को चार सत्रों में विभाजित किया गया है। इसमें 45 मिनट का नित्य आराधना एवं 45 मिनट का योग अभ्यास का सत्र होगा।

तीसरा सत्र 1 घंटे का होगा जिसमें वैदिक कक्षा लगेगी और एक घंटे रामानंदीय उपासना विधि का अध्ययन कराया जायेगा। वहीं चौथे और अंतिम सत्र में अर्चक पाठ का अभ्यास करेंगे। यह सत्र 2 घंटे का होगा जिसमें विशेष रूप से वेद मंत्रों के उच्चारण की शुद्धि का प्रशिक्षण दिया जायेगा।

प्राण प्रतिष्ठा के बाद पूजा पद्धति में होंगे ये बदलाव!

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह को एक भव्य रूप देने की तैयारी चल रही है। इस मकर संक्रांति के बाद 22 जनवरी 2024 को रामलला मंदिर में विराजमान हो जाएंगे, और प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही पूरी पूजा-पद्धति में भी बदलाव किए जा रहे हैं। बता दें कि अस्थायी राम मंदिर में अभी तक अन्य मंदिरों वाली पूजा-पद्धति ही अपनाई जा रही है। जिसमें सामान्य विधि से भगवान को भोग लगाना, नए वस्त्र धारण कराना और पूजन-आरती आदि के विधान हैं।

इस परंपरा से होगी पूजा !

प्राण प्रतिष्ठा के बाद पूजा पद्धति रामानंदीय परंपरा के अनुसार होगी। इसके लिए हनुमान चालीसा की तरह रामलला की स्तुति के लिए भी एक विशेष पुस्तक की भी रचना की गई है, जिसके आधार पर पूजा-आराधना की जायेगी। इसके साथ ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा अर्चकों को तैयार कर रहा है, जिनका चयन मेरिट के आधार पर किया जा रहा है।

अर्चकों को पूजा अर्चना में पारंगत करने के लिए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा एक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा, और इस स्पेशल ट्रेनिंग के बाद पुजारी पद पर उनका चयन किया जायेगा। इस दौरान उनके रखने खाने की व्यवस्था निःशुल्क की जायेगी, साथ ही उन्हें 2000 रुपए की छात्रवृत्ति भी दी जाएगी।

पिछले महीने पुजारी पद पर 3,000 आवेदकों में से 200 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए चयनित किया गया था। इस साक्षात्कार की प्रक्रिया अयोध्या के कारसेवकपुरम में पूरी की गई। आपको बता दें कि रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में सम्मिलित होने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई अन्य सम्माननीय साधु-संतों को भी आमंत्रित किया गया है।

तो यह थे, राम मंदिर से जुड़ी कई दिलचस्प बातें। उम्मीद करते हैं, आपको यह लेख पंसद आया होगा ऐसे ही व्रत, त्यौहार और अन्य धार्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहे

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