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मित्रों, भारतीय जन मानस में रामायण का विशेष महत्व है। इस महाकाव्य में रघुवंश के राजा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जीवन का वर्णन है। सनातन धर्म में प्रभु श्री राम को सामाजिक व धार्मिक चेतना का स्वरूप माना जाता है। आपको बता दें मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की वंशावली का पूरा ब्यौरा आज भी उपलब्ध है। इस लेख में हम आज इसी विषय पर प्रकाश डालेंगे।

वो इक्ष्वाकु के वंश से। तन से समर सूर्य ।। माथे पर तेज। भक्ति भाव से भरपूर ।। शास्त्रों के ज्ञानी । शस्त्र में निपुण।। महायोगी, महावीर, महानयोद्धा। जिसे दुनिया श्री राम कहती है।। अयोध्या में मनु के दूसरे पुत्र इक्ष्वाकु वंश के अति विशेष वंशज श्री राम ने जन्म लिया। इक्ष्वाकु को सूर्यवंशी कहा जाता है। इस राजवंश के संस्थापक का नाम इक्ष्वाकु था, लेकिन कुछ लोग इनको ऋषभदेव के नाम से जानते हैं। वहीं ऋषभदेव जिन्होंने जैन धर्म की सबसे पहले स्थापना की थी। इक्ष्वाकु वंश के 67 पीढ़ी में श्री राम का जन्म हुआ था। धार्मिक पुराणों में कहा जाता है कि अगर दुनिया में कोई जगह आध्यात्मिक, निष्ठा और ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध है तो अयोध्या है। तभी तो धर्म का बीज अयोध्या को कहा गया है।

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इमेज सोर्स – गूगल

रघुवंश की कहानी

वाल्मीकि रामायण के अनुसार श्री राम इक्ष्वाकू वंश में उत्पन्न हुए। भगवान राम की वंशावली का वर्णन कवि कालिदास ने ‘रघुवंश’ नमक महाकाव्य के अंतिम चार सर्गों में विस्तार से किया है।

इक्ष्वाकु वंश प्रभवो रामो नाम जैनः श्रतुः। नियत आत्मा महावीर्यो घुतिमान्वशी ।।

अर्थात – इक्ष्वाकु वंश प्राचीन भारत के शासकों का एक वंश हैं और इनकी उत्पत्ति सूर्यवंशियों से हुई है। अयोध्या कौशल राज्य की राजधानी थी और उसके राजा दशरथ थे। दशरथ की तीन पत्नियां थी। कौशल्या, कैकई और सुमित्रा । लेकिन वंश संभालने के लिए पुत्र रूपी उत्तराधिकारी नहीं था। महाराज दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करवाया और वो चार पुत्रों से धन्य हुए। राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न । हरिवंश पुराण के अनुसार चारों भाइयों की सबसे बड़ी बहन थी। जिसका नाम शांता था।

श्री राम की वंशावली का वर्णन

हम सभी जानते हैं, सृष्टि की रचना भगवान ब्रह्मा ने की है और उनका जन्म भगवान विष्णु की नाभि से हुआ है। सबसे पहले ब्रह्मा जी के 10 मानस पुत्रों का जन्म हुआ। उन्हीं में से एक मरीचि सातवें पुत्र थे। मरीचि के पुत्र कश्यप थे और उनके पुत्र विवस्वान हुए। विवस्वान के वैवस्वा मनु हुए और मनु के पुत्र इक्ष्वाकु हुए। विकुक्षि, बाण, अनरण्य, त्रिशंकु, धुन्धुमार, युवानाक्षव और मान्धाता हुए। विष्णु पुराण के अनुसार इक्ष्वाकु के 100 पुत्र थे। उनके बाद 6 और राजा थे। किश्स्वा के पुत्र थे प्रसेनजित प्रथम और उनकी पुत्री रेणुका ने ऋषि जमदग्नि से विवाह किया था। जिनके पुत्र भगवान परशुराम हुए। उनके बाद के वंशक थे। धुवसिन्धि, भरत, असित, सगर, असमज्ज, अंशुमान, दिलीप, भगीरथ हुए। वहीं भगीरथ ने ही अपने तपोबल से मां गंगा को पृथ्वी पर लाया था। इसके बाद ककुत्स्थ, रघु हुए। वाल्मीकि रामायण के अनुसार रघु बहुत पराक्रमी और तेजस्वी राजा थे। जिसकी वजह से इस वंश का नाम रघुवंश पड़ा।

इसके बाद इस वंश में छह ओर राजा हुए। ययाति के पुत्र नाभाग और उनके पुत्र अज हुए। जिनके घर राजा दशरथ का जन्म हुआ। राजा दशरथ के चार पुत्र हुए। श्री राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न । भगवान श्री राम के दो जुड़वा पुत्र लव और कुश हुए। भगवान विष्णु के अवतार श्री राम का जन्म चैत मास शुक्ला नवमी के दिन अयोध्या में हुआ था। भगवान विष्णु के अवतार श्री राम का जन्म चैत मास शुक्ला नवमी के दिन अयोध्या में हुआ था। इस लेख में हमने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्म से लेकर उनकी वंशावली को विस्तार से जाना। रामायण से जुड़े कई ऐसी रोचक बातों को जानने के लिए जुड़े रहे।

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