श्री नर्मदा चालीसा
॥ दोहा ॥ देवि पूजिता नर्मदा,महिमा बड़ी अपार। चालीसा वर्णन करत,कवि अरु भक्त उदार॥ इनकी सेवा से सदा,मिटते पाप महान। तट पर कर जप दान नर,पाते हैं नित ज्ञान॥ ॥ चौपाई ॥ जय-जय-जय नर्मदा भवानी।तुम्हरी महिमा सब जग जानी॥ अमरकण्ठ से निकलीं माता।सर्व सिद्धि नव निधि की दाता॥ कन्या रूप सकल गुण खानी।जब प्रकटीं नर्मदा…
